Srimad Valmiki Ramayana

ARANYA KANDASARGA: 13SHLOKA: 11
Srimad Valmiki Ramayana - Aranya Kanda - Sarga 13

किन्तु व्यादिश मे देशम् स उदकम् बहु काननम् ।
यत्र आश्रम पदम् कृत्वा वसेयम् निरतः सुखम् ॥ ॥३-१३-११॥

Kintu vyādiśa me deśam sa udakam bahu kānanam । Yatra āśrama padam kṛtvā vaseyam nirataḥ sukham ॥ ॥3-13-11॥

Translation

However, please point out a region to me that has abundant water and woods, where I can build a hermitage and reside happily and constantly.

हिंदी अनुवाद

किन्तु (अब) आप मुझे ऐसा कोई स्थान बताएं जो जल और वन-संपदा से युक्त हो, जहाँ मैं आश्रम बनाकर निरंतर सुखपूर्वक निवास कर सकूँ।


हिंदी टीका

स्तुति और शिष्टाचार के बाद, राम अब व्यावहारिक प्रश्न (Practicality) पर आते हैं। वे वनवास के लिए एक उपयुक्त स्थान की मांग करते हैं। उनकी आवश्यकताएं बहुत स्पष्ट और न्यूनतम हैं: 'स उदकम्' (जलयुक्त) और 'बहु काननम्' (घने वनों/काष्ठ से युक्त)। ये जीवन के लिए आवश्यक हैं और वाणिज्यिक अनुष्ठान करने के लिए आवश्यक हैं। 'निरतः सुखम्' (