Srimad Valmiki Ramayana

चलम् हि यौवनम् नित्यम् मानुषेषु विशेषतः ।
अक्षयम् यौवनम् प्राप्ता अमर्यः च भविष्य्थ ॥ ॥१-३२-१७॥
Calam hi yauvanam nityam mānuṣeṣu viśeṣataḥ । Akṣayam yauvanam prāptā amaryaḥ ca bhaviṣytha ॥ ॥1-32-17॥
Translation
"Youth is indeed always fleeting, especially among humans. By accepting me, you shall attain undecaying youth and become immortal."
हिंदी अनुवाद
"यौवन (जवानी) सदा ही चंचल (अस्थिर) होता है, विशेषकर मनुष्यों में। (मुझसे विवाह करके) तुम अक्षय (कभी नष्ट न होने वाला) यौवन प्राप्त करोगी और अमर (देवियों समान) हो जाओगी।"
हिंदी टीका
वायु देव अपनी बात को दार्शनिक तर्क से पुष्ट करते हैं। 'चलम् हि यौवनम्'—जवानी ढलने वाली है। मनुष्यों में बुढ़ापा जल्दी आता है ('विशेषतः मानुषेषु')। वे उन्हें 'अक्षय यौवन' (Eternal Youth) का वरदान देने का वादा करते हैं। 'अमर्यः' का अर्थ है अमर स्त्रियाँ। यह सौंदर्य और जीवन के प्रति मनुष्य के भय (Fear of aging) पर प्रहार है। वायु का मानना है कि कोई भी स्त्री शाश्वत यौवन के बदले अपने नश्वर जीवन को त्याग देगी। यह उन कन्याओं के चरित्र की परीक्षा है—क्या वे भौतिक लाभ (अमरता/सुंदरता) चुनती हैं या अपने धर्म और पिता के सम्मान को महत्व देती हैं?